शान्ति-कपोत के पंखों की तरह खड़ी हो तुम अडिग कैसे मर सकती हो तुम, सदा को ! शान्ति-कपोत के पंखों की तरह खड़ी हो तुम अडिग कैसे मर सकती हो तुम, सदा को !
आवाज़ आग भी तो हो सकती है आवाज़ आग भी तो हो सकती है
फिर तुम्हें लेे गई थी मै पास के पुलिस थाने, पर वहां यह कह दिया गया कि पास ही बंजारों क फिर तुम्हें लेे गई थी मै पास के पुलिस थाने, पर वहां यह कह दिया गया कि पास ही ...
तुम केवल श्रद्धा नहीं हो तुम केवल श्रद्धा नहीं हो
हर कोई अच्छा नहीं हो सकता है, लेकिन हर किसी में कोई न कोई बात अच्छी होती है। कभी भी हर कोई अच्छा नहीं हो सकता है, लेकिन हर किसी में कोई न कोई बात अच्छी होती है।...
उसको देख कर मैं फिर बेहाल था क्या? और उसका भी यही सवाल था क्या? हम पास होकर भी क्यों उसको देख कर मैं फिर बेहाल था क्या? और उसका भी यही सवाल था क्या? हम पास होक...